Thursday, 30 July 2015

Aadhyatm

Adhyatmikta me aapka swagat hai

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः |
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ||

2 comments:

  1. धन रहै न जोबन रहे, रहै न गांव न ठांव।
    कबीर जग में जस रहे, करिदे किसी का काम।

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  2. वासुदेव सर्वम...

    भक्ति कही भी की जा सकती है

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